जिंदगी की जंग हार गया सचिन
प्रयागराज। यूरिनरी ब्लाडर कैंसर (पेशाब की नली में कैंसर) से पीड़ित 11 वर्षीय बालक सचिन प्रजापति आखिरकार जिंदगी की जंग हार गया। हालत बिगड़ने पर सचिन के पिता रामधनी ने तीन दिन पहले स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में भर्ती कराया था। मंगलवार शाम करीब साढ़े सात बजे सचिन का दम टूट गया। डाक्टरों के अनुसार, कैंसर उसके फेफड़े तक फैल चुका था। दोपहर बाद पेट का पानी निकाला गया था, थोड़ी देर में उसे उल्टी होने लगी, फिर सांस थम गई।
बारा तहसील क्षेत्र के धरा गांव निवासी सचिन को जब कैंसर हुआ तो उपचार के लिए पिता भटकने लगे थे। जुलाई 2023 में एसआरएन अस्पताल में दिखाया। तब कैंसर तीसरी स्टेज में था। इससे पहले कुछ दिनों तक उपचार कमला नेहरू हास्पिटल में हुआ। बेटे की जान बचाने के लिए पिता रामधनी, पत्नी के साथ इधर-उधर दौड़ते रहे।
मंडलायुक्त ने पूरी की थी सचिन की आखिरी इच्छा: सचिन प्रजापति की इच्छा प्रशासनिक अफसर बनने की थी। इसकी जानकारी मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत को हुई तो उन्होंने
15 जुलाई को सचिन को कार्यालय बुलाकर अपनी कुर्सी पर बैठा दिया। मंडलायुक्त की कुर्सी पर सचिन 20 मिनट तक बैठकर जुबानी रूप से कई आदेश दिए थे। मंडलायुक्त के निर्देश पर बेहतर इलाज होने लगा। इसके बाद उसकी जान बचाने को डाक्टरों ने जान लड़ा दी। डा. देवकुमार के अनुसार, सचिन की चार बार कीमोथेरेपी की जा चुकी थी।
समाजसेवियों ने की मदद: सचिन प्रजापति की जान बचाने के लिए अनिकेत फाउंडेशन के डा. अखिलेश कुमार द्विवेदी, समाजसेवी निशा मिश्रा समेत कई अन्य लोगों ने जितना संभव हो सका रामधनी प्रजापति की मदद की। उपचार में कोई रुकावट न आए, इसके लिए वाट्सएप ग्रुप बनाकर आर्थिक चंदा जुटाया।


