शादी के 12 दिन बाद नवविवाहिता की चाकू से हत्या, अभी तो हाथों की मेहंदी भी नहीं उतरी थी! दहेजलोभियों ने उतारा मौत के घाट...
आगराः बेटी की विदाई को 12 दिन ही हुए थे। हाथ और पैरों में सजाई गई मेहंदी भी सुर्ख थी। बेटी की विदा करवाने के लिए घर में तैयारी थी और स्वागत के इंतजाम भी। 12वीं रात 12 बजे उसकी बीमारी का फोन आया तो मायके वालों का दिल घबराने लगा। बेटी की ससुराल के शहर में पहुंचे तो कलेजा फट पड़ा। तय दिन शनिवार को विदाई तो हुई लेकिन बेटी बेजान मिली। खुशियों की जगह अब कलेजे की आग हत्यारे दामाद को सजा दिलाने के लिए भभक रही है।
फिरोजाबाद के रसूलपुर की गली नंबर सात के रहने वाले पशु व्यापारी अमर सिंह के सात बच्चों में सबसे छोटी प्रियंका की शादी के लिए परिवार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। आगरा आकर धूमधाम से शादी करवाई और विदा किया। शादी के चार दिन बाद बेटी प्रियंका के पगफेरे में जब पति के साथ मायके पहुंची तो उसके चेहरे की रौनक देखकर मायके वाले खुश हो गए। लगा कि बेटी को अच्छे घर में पहुंचाया है। तय हुआ कि शनिवार को विदाई कराने आएंगे। शुक्रवार की रात दामाद रोहित ने प्रियंका के बीमार होने की जानकारी दी तो लगा कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन यहां तो सब कुछ खत्म हो जाएगा। सबसे पहले पहुंची बड़ी बहन मंजू ने प्रियंका का शव देखा तो फफक पड़ी। इसके एक घंटे बाद ही फिरोजाबाद से पिता अमर सिंह बेटों के साथ पहुंच गए।
सरकारी टीचर का देखा था सपना..
दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराने ताजगंज थाने पहुंचे अमर सिंह रोते-रोते गिरकर बेहोश हो गए। होश में आने के बाद उन्होंने बताया कि प्रियंका पढ़ाई में अव्वल थी। बीटीसी करने के बाद टैट की परीक्षा भी पास कर ली थी। तीन बेटियों की शादी आगरा में ही हुई है, इसलिए उन्होंने इंजीनियर से प्रियंका का विवाह करवा दिया। जल्दी ही उसकी सरकारी टीचर की नौकरी लगने की उम्मीद थी, लेकिन सब कुछ खत्म हो गया
वीडियो काल पर छुपाती रही प्रियंका
प्रियंका की बहन मजू ने बताया कि शादी के अगले ही दिन वीडियो काल पर बातचीत में प्रियंका उदास दिखी। वीडियो काल के दौरान ननद और देवर भी था। बाद में सोचा कि चार दिन बाद मायके आएगी तो बात करेंगे, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। उसके पति और परिवार ने जो अमानवीयता की, वह असहनीय है। हम सजा दिलाना चाहते हैं।
परिवार कर रहा था इंतजाम..
अमर सिंह का कहना है कि शादी के बाद प्रियंका के ससुराल वालों ने कार की मांग कर दी। तीनों बेटों से बात की तो सब तैयार हो गए। कार के लिए पैसों का इंतजाम कर रहे थे। पग फेरे में जब दामाद घर आया तो उससे बात की। कहा था कि जल्दी कार दे देंगे। दामाद भी तैयार हो गया था, लेकिन विदाई से एक रात पहले दामाद ने अपने परिवार के साथ मिलकर उसे मार डाला।


