एआइ रोकेगा अवैध खनन वाले वाहन
बाराबंकी: अवैध बालू या मिट्टी खनन करने वाले वाहनों को पकड़ने के लिए अधिकारियों को अब ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी होगी। जिलों की सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव रहित (एआइ और इंटरनेट आफ थिंग्स अर्थात आइओटी आधारित) चेक गेट बनाए जाएंगे, जो कैमरों से लैस होंगे। इसकी शुरुआत अयोध्या बार्डर पर रामसनेहीघाट के नारायण ढाबा के निकट से होगी। चेक गेट के पास आते ही वाहन के नंबर से पता चल जाएगा कि वाहन में वैध खनन या अवैध खनन का खनिज लदा है।
लखनऊ-अयोध्या हाईवे के बाद लखनऊ-सुलतानपुर, लखनऊ- महमूदा सहित अन्य के प्रमुख मार्गों पर सीमावर्ती स्थानों पर यह गेट लगाए जा सकते हैं। इस गेट बनाने की लागत करीब 40 लाख रुपये आती है। इटावा, फतेहपुर व महोबा सहित प्रदेश के 25 जिलों में मानव रहित चेक गेट पहले से बने हैं। गेट खनन विभाग के शासन व जिला स्तर पर बनाए जाने वाले कमांड सेंटरों से जुड़े हैं।
डीएम सत्येंद्र कुमार ने बताया कि लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर अयोध्या बार्डर पर मिट्टी व बालू लदे अवैध खनन वाले वाहनों का आवागमन ज्यादा रहता है। खनन अधिकारी शैलेंद्र मौर्य की आख्या के बाद अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण के दृष्टिगत मानव रहित चेक गेट लगाने का निर्णय लिया गया है। शीघ्र ही चेक गेट को बनाने का काम शुरू हो जाएगा।
डीएम ने बताया कि जब किसी वाहन में कोई खनिज लादा जाता है, तब उसका जो पर्चा कटता है, उसकी आनलाइन फीडिंग की जाती है। गेट में कैमरे लगे होते हैं। आनलाइन फीडिंग का डाटा भी गेट में लगी मशीन में पहुंच जाता है। ऐसे में जैसे ही गेट के कैमरे की परिधि में वाहन आता है, उसके नंबर से वाहन के ऊपर लगे खनिज का विवरण पता चल जाता है। अवैध खनिज के साथ ही ओवरलोडिंग का भी पता चल जाता है। वाहन के नंबर के आधार पर चालान कटकर वाहन स्वामी के पास आनलाइन पहुंच जाता है। अयोध्या बार्डर पर लगाने के बाद इसकी उपयोगिता का पता चल जाएगा।


