डिजिटल तकनीक से साधा जाएगा गरीबी मिटाने का लक्ष्य
लखनऊ: उत्तर प्रदेश को एक वर्ष में देश का पहला गरीबी मुक्त राज्य बनाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प को डिजिटल तकनीक की मदद से साधने की कोशिशें शुरू की गईं हैं। जीरो पावर्टी पोर्टल और एप के जरिये न सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धनतम परिवारों का चयन किया जाएगा बल्कि उनका स्थलीय सत्यापन करते हुए तमाम विभागों की और से संचालित योजनाओं का लाभ भी उन तक पहुंचाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की जिले से लेकर शासन स्तर तक निगरानी भी आनलाइन ही की जाएगी।
गरीबी मुक्त अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए शासन की और से डिजिटल टेक्नोलाजी के उपयोग और डिजिटल पोर्टल व मोबाइल एप पर कार्य करने संबंधी दिशा निर्देश दिए गए हैं। अभियान के तहत जीरो पावर्टी पोर्टल (zero-poverty.in) केंद्रीय पोर्टल की तरह कार्य करेगा। वहीं, अन्य विभागों या स्वायत्त इकाइयों के नाम का उल्लेख जीरो पावर्टी पोर्टल के पहले होगा। जैसे ग्राम्य विकास विभाग पोर्टल पर सब डोमेन (rd.zero-poverty.in) के साथ प्रदर्शित होगा। बेसिक शिक्षा विभाग (basic-education. zero-poverty.in) भी पोर्टल पर सब डोमेन ही दिखेगा। विभागों के नाम की सूची पोर्टल पर स्पष्ट दिखाई देगी, इसलिए इसे लेकर भ्रम की स्थिति नहीं रहेगी।
माप-अप मोबाइल एप से होगी गरीब परिवारों की पहचान
डिजिटल तकनीक के तहत जहां कंप्यूटर की सुविधा नहीं होगी, वहां मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा। माप-अप मोबाइल ऐप का प्रयोग निर्धनतम परिवारों की पहचान के लिए किया जाएगा।
ग्राम स्तरीय कर्मचारी, समिति के सदस्य पदाधिकारी इस एप का उपयोग कर सकेंगे। ग्राम स्तरीय कर्मचारियों द्वारा चिह्नित किए गए निर्धन परिवारों का रिकार्ड मोबाइल के डैशबोर्ड पर प्रदर्शित होगा, जिसके आधार पर ग्राम स्तरीय पांच सदस्यीय समिति के सदस्य उन परिवारों का स्थलीय सत्यापन करेंगे और एप पर ही अपनी टिप्पणी दर्ज करेंगे।
इस एप की मदद से ग्राम स्तरीय कर्मचारियों की टीम 30 दिन के अंदर अपनी ग्राम पंचायत में निवास कर रहे सभी निर्धनतम परिवारों की पहचान कर सकेगी। वहीं, ग्राम्य विकास विभाग द्वारा संचालित रिश्ता मोबाइल एप, जिस पर बीसी सखी के सभी गतिविधि का विवरण उपलब्ध होता है, वह गरीब परिवारों और उनके बैंकिंग लेन-देन की सूचना शासन को उपलब्ध कराएगा।
सीएम हेल्पलाइन से मिलेंगे अलर्ट
सभी निर्धनतम परिवारों के साथ-साथ ग्राम स्तरीय कर्मचारियों और समिति के सदस्यों का डेटाबेस पोर्टल पर उपलब्ध होगा। ऐसे में सीएम हेल्पलाइन द्वारा ना सिर्फ इन्हें वेब आधारित काल किया जाना संभव होगा, बल्कि माप-अप मोवाइल एप के माध्यम से अलर्ट, नोटिफिकेशन और अन्य अपडेट संदेश भी भेजे जा सकेंगे। भेजे गए सभी अलर्ट का रिकार्ड यूजर के मोबाइल पर उपलब्ध रहेगा


