छठी शताब्दी में कुल कितने के महाजनपद और गणराज्य
छठी शताब्दी ई० पू० में भारत की राजनीतिक स्थितिः छठी शताब्दी ईसापूर्व में भारत के राजनीतिक क्षितिज पर किसी एक शक्तिशाली केन्द्रीय सत्ता का अभाव था। तत्कालीन राजनीतिक स्थिति का ज्ञान हमें कुछ साहित्यिक साक्ष्यों से होता है। बुद्ध के आगमन के पूर्व भारतवर्ष अनेक राज्यों में विभक्त सा। बौद्धग्रन्ध अंगुत्तर निकाय में राज्यों के नाम मिलते हैं जो उस समय थे। वे है उन 16 काशी, कोशल, अंग, मगध, वज्जि, मल्ल, चोदि, वत्स, कुरू, पंचाल, मत्स्य, धूरसेन, अश्मक, अवन्ति, गन्धार, और कम्बोज। जनबसभ सुता में 12 राज्यों के नाम मिलते है। चुल्लनिद्देश के 16 महाजनपदों की सूची में कलिंग भी है और गान्धार के स्थान पर योन का वर्णन है। जैनग्रन्थ भगवती सूत्र में वर्णित 16 मूहाजनपदों के सम्बन्ध में डॉ० हेमचन्द राय चौधरी का विचार है कि इसमें जिन राज्यों के नाम गिनाए गये है वे सुदूर पूर्व और सुदूर दक्षिण भारत की राजनीतिक स्थिति के सूचक है। उनका विस्तार यह सिद्ध करता है कि वे अंगुतर निकाय में उल्लिखित राज्यों के बाद के है। अतः छठी शती ई० पू० की राजनीतिक स्थिति जानने के लिए अंगुतर निकाय की सूची को ही प्रमाणिक मानना चाहिए। इस सूची को देखने से लगता है कि इनमें दो प्रकार के राज्य थे। प्रथम राजतंत्रात्मक राज्य जिसमें अंग मगध काशी, कोशल चेदिवत्स, कुरू पंचाल, मत्स्य, शूरसेन, अश्मक, अवन्ति, गन्धार और कम्बोज थे। द्वितीय गणतंत्रात्मक राज्य, जिसमें बज्जि और मल्ल राज्य शामिल थे। इन षोडश महाजनपदों का संक्षिप्त विवरण निम्नवत् है-
1. अंग :
अंग जनपद आधुनिक बिहार राज्य के भागलपुर और मुंगेर जनपद के भू-भाग शामिल थे। इनकी राजधानी चम्पा थी। यह मगध जनपद के पश्चिम में था। चम्पा नदी इन दोनों जनपदों के मध्य विभाजक रेखा थी। अंग की राजधानी चम्पा का प्राचीन नाम 'मालिनी' था जो बुद्ध युगीन छः महानगरियों में परिगणित थी। दिधनिकाय के अनुसार इसकी नगर योजना वास्तुकार महागोविन्द ने बनायी थी। अंग और मगध का मध्य प्रायः संघर्षमय सम्बन्ध था। यहाँ के शासक ब्रह्मदत्त ने मगध राज भट्ट को हराया था। जिसका प्रतिकार मगध राज बिम्बिसार ने लिया था। अंग को अपने में मिला लिया था।
2. मगंध :
यह आधुनिक बिहार राज्य के पटना और गया जिले के भू-भांगों पर स्थित था। जिसकी सीमा उत्तर में गंगा से दक्षिण में विन्ध्यपर्वत तक तथा पूर्व में चम्पा (अंग) से पश्चिम में सोन नदी तक विस्तृत थी। इसकी प्राचीन राजधानी गिरिश्रम या राजगृह थी। कालान्तर में पाटलिपुत्र इसकी राजधानी बना । पौराणिक क्लब में यहाँ के दो प्रसिद्ध राजाओं के नाम मिलते है। बेहै वृहद्रथ और जरासंघ।
3. काशी: आधुनिक वाराणसी और उसका निकटवर्ती
भू-भाग प्राचीन काशी महाजनपद था। वाराणसी नगरी इसकी राजधानी थी। जो उत्तर में वरूणा और दक्षिण में अंसी नदियों से परिबद्ध था। गुत्तिल जातक के अनुसार यह नगर 12 योजना तक विस्तृत थी। सोननन्द जातक के अनुसार किसी समय मगध, कोशल और अंग पर काशी का अधिकार था। काशी और कोशल के सम्बन्ध संघर्षमय थे जिनकी सूचना बौद्धग्रन्थों में विस्तार से सुरक्षित है। यहाँ का सबसे बड़ा राजा ब्रह्मदत्त था जिससे कोशल को जीता था। अंततः कोशल राज बांस ने इसे जीत लिया। जैन तीर्थकार पार्श्वनाथ के पिता अश्वसेन काशी के ही राजा थे।
4. कोशल:
इसके अन्तर्गत वर्तमान अवध क्षेत्र (फैजाबाद मण्डल) के क्षेत्र सम्मिलित थे। यह उत्तर में नेपाल से दक्षिण में सई नदी तथा पूर्व में गण्डक नदी से लेकर पश्चिम में पांचाल की सीमा तक विस्तृत था। रामायण काल में इसकी राजधानी अयोध्या थी और छठीशती ई० पू० में श्रावस्ती । कोशल राज्य दो भाग में बँटा था। एक भाग की राजधानी अयोध्या और दूसरे की श्रावस्ती थी। कोशल नरेश कंझ ने ही काशी पर आधिपत्य स्थापित किया।
5. बज्जि
यह एक गणतंत्रात्मक जनपद था। यह आठ राज्यों का एक संघ था। इस संघ में बज्जि के अतिरिक्त वैशाली के लिच्छवि, मिथिला के विदेह और कुण्डग्राम के ज्ञातृक भी विशेष उल्लेखनीय गण थे। लिच्छवीगण बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में शासक थे इनकी राजधानी बैशाली थी। इसकी पहचान बसाढ़ (मुजफ्फरपुर) से की जाती है। विदेहों की राजधानी मिथिला की पहचान नेपाल के समीप जनकपुर से की जाती है।
प्रारम्भ में यहाँ राजतंत्रात्मक प्रणाली थी। कुंडग्राम भी वैशाली के ही समीप था। गणवों अन्य राजाओं के बारे में किसी निश्चित जानकारी का सर्वथा अभाव है। जैन साहित्य में ज्ञातृकों के साथ उग्र, भोग, कौरव और ईक्ष्वाकु को एक ही संथागार का सदस्य कहा गया है। संभव है ये ही शेष गण हों। बुद्ध के समय यह शक्तिशाली गण था। मगधराज अज्ञान शत्रु ने इसकी स्वतंत्रता समाप्त की थी।
6. मल्ल
यह भी एक गणतंत्रात्मक राज्य था। ये वर्तमान उत्तरप्रदेश के कुशीनगर पडरौना और देवरिया के कुछ अंगों पर स्थित था इसकी दो मुख्य शाखाएं थी। प्रथम पावा (पडरौना) के मल्ल और द्वितीय कुशीनारा (कुशीनगर) के मल्ल। प्रारम्भ में यह गण भी राजतंत्र ही था और बाद में गण बना। कुस जातक में यहां के एक राजा ओक्काक का वर्णन मिलता है। बुद्ध के समय तक यह स्वतंत्र था।
7. चेदि :
आधुनिक बुन्देल खण्ड और उसके समीपवर्ती भू-भागों पर चेदि नामक महाजनपद स्थित था। जिसकी राजधानी शक्त्तिमती थी। जातक ग्रन्थों में इसे 'वसोत्थिवती कहा गया है। महाभारत काल में इसका राजा शिशुपाल था जिसे श्रीकृष्ण ने मारा था। चेतिय जातक में एक राजा 'उपचर का भी नाम मिलता है।

