सामाजिक मानवशास्त्र क्या है ? इसके अध्ययन-क्षेत्र और प्रकृति की विवेचना।
सामाजिक मानवशास्त्र को परिभाषित कीजिए तथा इसके विषयक्षेत्र का वर्णन
सामाजिक मानवशास्त्र सामाजिक मानवशास्त्र की वह शाखा है जो आदिम मानव के सामाजिक संगठन, सामाजिक संस्थाओं, विभिन्न अवस्थाओं तथा सामाजिक संबंधों के स्वरूपों का अध्ययन करती है। सामाजिक मानवशास्त्र आदिम समुदायों के संदर्भ में इन्हीं विशेषताओं का अध्ययन करने वाला सामाजिक विज्ञान है।
परिभाषा- रैडक्लिफ ब्राउन (R. Brown) ने लिखा है कि सामाजिक मानवशास्त्र समाजशास्त्र की वह शाखा है जो आदिम अथवा सरल समाजों का अध्ययन करती है।
इवाएं प्रिचार्ड (Evans Pritchard) के अनुसार “सामाजिक मानवशास्त्र समाजशास्त्रीय अध्ययनों की वह शाखा मानी जा सकती है जो अपने को मुख्यतः आदिम समाजों के अध्ययन में लगाती है।
मरडॉक (Murdock) के शब्दों में “सामाजिक मानवशास्त्र सांस्कृतिक मानवशास्त्र की वह शाखा है जो व्यक्तियों के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन करती है। "
नैडेल (Nadel) ने लिखा है कि "सामाजिक मानवशास्त्र का प्राथमिक उद्देश्य मनुष्यों का ज्ञान प्राप्त करना तथा उस संस्कृति को समझना है जिसका उन्होंने निर्माण किया है तथा जिससे संबंधित व्यवस्था के अर्न्तगत वे रहते है और कार्य करते हैं। "
उपर्युक्त परिभाषाओं से यह निष्कर्ष निकलता है कि सामाजिक मानवशास्त्र सामाजिक संगठन सामाजिक व्यवस्था तथा सामाजिक व्यवहारों के संबंधित वह विज्ञान है जो मुख्यतः आदिकालीन मानव तथा समाज के अध्ययन में रूचि लेता है।
सामाजिक मानवशास्त्र का अध्ययन वस्तु एवं क्षेत्र सामाजिक मानवशास्त्र के अध्ययन क्षेत्र एवं विषय वस्तु बारे में विभिन्न विद्वानों ने भिन्न-भिन्न विचार है। एक ओर अमरीका के अधिकांश मानव शास्त्री यह मानते है कि सामाजिक मानवशास्त्र मुख्य रूप से आदिम संस्कृति के अध्ययन से संबंधित है जबकि दूसरी ओर इग्लैंड के अधिकांश मानवशास्त्री इस पक्ष में है कि मानवशास्त्र के अर्न्तगत आदिम सामाजिक संगठन सामाजिक संरचना, सामाजिक प्रक्रियाओं तथा संस्थागत व्यवहारों का ही अध्ययन किया जाता है। पिडिंग्टन का विचार है कि सामाजिक मानवशास्त्र केवल आदिम समुदायों का अध्ययन है जबकि इवांस प्रिचार्ड तथा ब्राउन का विचार है कि सामाजिक मानवशास्त्र के अध्ययन क्षेत्र के अन्तर्गत उन सभी समुदायों का अध्ययन किया जाता है जिनकी एक दूसरे से तुलना करके समाज की समग्रता को समझा जा सके।
सामाजिक मानवशास्त्र की विषयवस्तु एवं अध्ययन क्षेत्र को अधिक स्पष्टता के साथ समझने के लिए यहां पर यह विचार कर लेना चाहिए कि सामाजिक मानवशास्त्री किन-किन बातों का अध्ययन अपने विषय के अर्न्तगत नहीं करते
1. सामाजिक मानव शास्त्री सम्पूर्ण संस्कृति का अध्ययन नहीं करता है।
2. सामाजिक मानव शास्त्री अपने आपको आदिम या सरल समाजों के अध्ययन तक ही सीमित नहीं रखता है।
3. सामाजिक मानव शास्त्री सम्पूर्ण समाज का अध्ययन हीं करता हैं।
4. सामाजिक मानवशास्त्री अपने को देश और काल की सीमाओं में नही बाधता है।
5. सामाजिक मानवशास्त्र के अध्ययन क्षेत्र के अर्न्तगत वे सभी सम्मलित है जो आदिम मानव की सामाजिक व्यवस्था से संबंधित है। उदाहरण के लिए जनजातीय अर्थव्यवस्था, जनजातीय पंचायत, कानून, विवाह, परिवार, नातेदारी, धर्म, जादू, टोटम विधि निषेध तथा इसी प्रकार की दूसरी सभी संस्थाएं सामाजिक मानवशास्त्र की अध्ययन वस्तु है।
6. सामाजिक मानव शास्त्र का अध्ययन क्षेत्र दूसरे सामाजिक विज्ञानों की तुलना में बहुत अधिक व्यापक है। इसका कारण यह है कि सामाजिक मानवशास्त्र के अन्तंगत संसार के प्रत्येक भाग में फैले हुए आदिम समाजों की विभिन्न व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है।
7. मानव प्रजातियां एक जैविकीय तथ्य है लेकिन साथ ही इसके सामाजिक पक्ष की अवहेलना नहीं की जा सकती। प्रजाति के आधार पर आज आदिम समुदायों में भी विभाजन स्पष्ट होने लगता है इस दृष्टिकोण से सामाजिक मानवशास्त्र ने केवल विभिन्न S प्रजातियों का अध्ययन करता है बल्कि विभिन्न प्रजातीय समूहों के U बीच पायी जाने वाली समानताओं की खोज करके तथा प्रजाति से संबंधित भ्रान्तियों का निराकरण करके सम्पूर्ण आदिम समुदाय को एक दूसरे से सम्बद्ध करने का प्रयास करता है।

