कचरे की कृति को नमन सफाई कर्मी ने बनाया माँ भारती की स्टेचू
बस्ती। सोच अच्छी हो तो हर काम आसान हो जाते है, गांव वालों ने कभी नहीं सोचा होगा कि हमारे घरों का बेकार , प्लास्टिक, फेंके गये बोरे, लोहे आदि कचरे भी हमारे काम आ जायेगा, विकास खण्ड -बहादुरपुर के ग्राम पंचायत शेखपुरा मे तैनात सफाई कर्मी सूरज चक्रवर्ती ने कुछ ऐसा ही किया कि उस गांव के कचरे को कभी ग्रामनिधि तो कभी पंचायत ओ यस आर खाते मे जमा कर उसकी धनराशि बना दिया।
जिससे गांव का विकास हो, तो कभी इसी कचरे की मदद से गांव मे कई कलाकृतियां जोकि उस गांव की पहचान बनी, सूरज की तैनाती जहाँ भी हुई, उसने ग्रामीणों को स्वच्छता एवं प्लास्टिक से पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित भी किया, जिससे अधिकारी एवं ग्रामीण भी उसकी तारीफ करते नहीं थकते,
सूरज ने इस बार लोगों को पालीथीन का प्रयोग न करने के लिए प्रेरणा के साथ उसका एक बेहतर रीयूज़ किया, गांव मे सफाई के दौरान छोटे -छोटे लोहे के टुकड़े सरिया आदि तो सभी को मिलते है,और गांव मे लगे प्रचार होर्डिंग के टूटे लोहे के स्टिक से एक पुतले के कंकाल का रूप दें, जिस पर पालीथीन की रस्सी की मदद से शरीर की संरचना बना कर उसके ऊपर जूट के बोरे एवं कुछ सीमेंट लगाकर कर एक स्टेचू बना दिया, जिसे पेंटिंग पश्चात् माँ भारती का नाम दिया, अब लोग उसी कचरे की कृति को रोज देखने आ रहे है, और लोग अपने घरों मे पालीथीन एकत्रित करने शुरू कर दिए, वही सूरज मे बताया कि, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रा. ) उत्तर प्रदेश के निर्देश के क्रम मे जिलाधिकारी महोदय ने पंचायत विभाग को प्लास्टिक कचरे कम करने के लिए कुछ कचरे रीयूज़ का सुझाव दिया।
उसने डी पी आर ओ बस्ती एवं अपने स्वच्छता गुरु राजा शेर सिंह व विष्णुदेव तिवारी की अनुमति से कचरे का रीयूज़ कर माँ भारती की प्रतिमा बनाया, जिसमें कुल 580/- रू का खर्च लगा जिसे ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अमरनाथ चौधरी ने दिया।

