उत्तर प्रदेश में बनाए जाएं तीन प्रदेश छोटे राज्य होने से होगा पूरा विकास
मुजफ्फरनगर : पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पांच जनपदों को एनसीआर में शामिल होने से कोई लाभ नहीं हो रहा है, तमाम प्रकार के उद्योगों को मुश्किल झेलनी पड़ रही है। इसलिए इन पांचों जिलों को दिल्ली राज्य में शामिल किया जाना चाहिए। यह विचार सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं नवराज्य निर्माण महासंघ के कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल सिंह मांडी ने प्रेसवार्ता में व्यक्त किए।
शनिवार को शहर में रुड़की रोड स्थित मिर्च मसाला रेस्टोरेंट में प्रेसवार्ता में रामपाल सिंह मांडी ने कहा कि जनपद मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली और हापुड़ को एनसीआर में शामिल किया गया है, लेकिन इसका कोई भी लाभ इन जनपदों को नहीं मिल रहा है। जो डीजल गाड़ी अन्य जनपदों में 15 साल चलती हैं, वह एनसीआर में होने की वजह से दस साल ही चलाई जा सकती हैं, जबकि टैक्स 15 साल का जमा कराया जाता है। प्रदूषण की बात कहकर ईंट भट्ठा सही समय पर नहीं चल पा रहे हैं, जिसके कारण इन इंटों की कीमत दोगुणा हो गई है। इसी तरह पेपर और लोहा इंडस्ट्री को भी एनसीआर में शामिल होने से कई तरह के नुकसान झेलने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि या तो इन जनपदों को एनसीआर से बाहर किया जाए, अन्यथा दिल्ली राज्य में शामिल किया जाए। उत्तर प्रदेश पश्चिम के 17 जिलों को दिल्ली में शामिल कर दिया जाए। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में
तीन अलग प्रदेश बनाए जाएं, जिनमें पूर्वांचल, पश्चिमांचल और रुहेलखंड शामिल हैं। ताकि इन क्षेत्रों का छोटे प्रदेश होने से पूरा विकास होगा। अपनी इन्ही मांगों को लेकर नवराज्य निर्माण महासंघ 11 दिसंबर को मुजफ्फरनगर से हजारों कार्यकर्ताओं के साथ जंतर मंतर दिल्ली पर धरना देगा। वहीं, रामपाल मांडी ने खिलाड़ी प्रियंका पंवार के पिता शिवकुमार पंवार को महासंघ में उत्तर प्रदेश वरिष्ठ महामंत्री जबकि एडवोकेट चन्द्रदीप बालियान को सहारनपुर मंडल की जिम्मेदारी दी है। इस दौरान धर्मवीर वालियान, बिल्लू चौधरी मौजूद थे।


