दर्दनाक सड़क हादसा, डीसीएम-आटो में भिड़ंत, 11 की मौत, मां की गोद में ही मौत की नींद सो गए....
यूपी, हरदोई। जाने कौन से पल आटो पर सवार होकर लोग निकले थे। बच्चे अपनी मां की गोद में हंस खेल रहे थे तो दोनों बहनें आपस में बातों में मशगूल थीं। माधौगंज से बैठे सभी जनों को विलग्राम तक जाना था। कम ही दूरी में सभी बातें करते चले आ रहे थे। उन्हें क्या पता था कि रास्ते में उनका काल इंतजार कर रहा है। तेज रफ्तार से डीसीएम उनका काल बनकर आई और पलक झपकते ही सभी को मीत की नींद सुला दिया। रोशनी के साथ ही उसकी गोद में दोनों बच्चे सो गए तो सुनीता की बेटी भी मां के साथ चिपको ही रह गई। जो गंभीर रूप से घायल थे, वह भी मौलने की स्थिति में नाहीं थे। हादसा इतना भयानक था, जिसे देखकर सभी को रूह कांप गई।
पूरा मामला
सामने आए बाइक सवार को बचाने में एक डीसीएम ने 15 सवारियां लादकर जा रहे आटो में टक्कर मार दी। दुर्घटना में आटो में सवार 11 लोगों की मौत हो गई और चालक समेत चार लोग धायल हो गए। मरने वालों में तीन बच्चों के साथ छह महिलाएं, दो पुरुष शामिल है।
हादसा कटरा-बिल्हौर हाईवे पर बिलग्राम क्षेत्र में बुधवार दोपहर साढ़े बारह बजे हुआ। यह आटो हाईवे पर माधौगंज से बिलग्राम की तरफ आ रहा था तभी सामने से आ रही डीसीएम ने बाइक सवार को बचाने के प्रयास में उसे टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि आटी के चीथड़े उड़ गए। चीख पुकार मचते ही लोग एकत्र हो गए और पुलिस ने सभी को सीएचसी पहुंचाया। जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक ने मौके पर पहुंचकर जानकारी ली और पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर व्यवस्थाएं कराई।
वीरों सुनकर नम हो रहीं की हर आंख दिल दहला देने वाले इस हादसे ने एक परिवार उजाड़ दिया और बच्चों को मां से जुद कर दिया। पोस्टमार्टम हाउस पर अपनों के शवों को देखकर स्वजन लिपट लिपट कर रोते रहे। हार तरफ चीखें हो सुनाई पड़ रही थीं ती महिला पुलिसकर्मी इन रोती बिलखती महिलाओं को गले लगाकर आंसू पोंछती नजर आई। यह मंजर
देखने वाली हर आंख नम थी।
पोस्टमार्टम हाउस पर शव वाहन से एक साथ 11 शव
पोस्टमार्टम हाउस पर शव वाहन से एक साथ 11 शव लगाए गाए। वाहनों से शव उतारने के लिए कोई आगे नहीं आया। काफी देर इंतजार करने के बाद पुलिसकर्मियों ने एक एक कर शवों को उतार कर पोस्टमार्टम हाउस के अंदर पहुंचाया। इसके बाद परिवारीजन के आने का सिलसिला शुरू हो गया। कुछ ही देर में मौके पर भारी भीड़ जमा हुई। चीख-पुकार से पोस्टमार्टम हाउस दहल गया। अपनों को पहचानने के बाद शवों से लिपटकर परिवारोजन विलख विलख कर रोते रहे। कोई बेटे का नाम लेकर दो कोई बहू पौत्र-पौत्री का नाम लेता और कुछ रोने के बाद बेहोश हो जाता, कोई भी पानी देने वाला नहीं था। आखिर में महिला पुलिसकर्मियों ने मदद को हाथ बहाए। रोती महिलाओं के आंसू पोंछतों और पानी पिलातों तो किसी की डांडस बंधाती नजर आई।
दो दिन पहले माधुरी को मिली थी नौकरी माधुरी के पिता राम सिंह का कहना था कि उसका दामाद सफाईकर्मी था। कुछ वर्ष पहले दामाद की मौत ही चुकी थी। दो दिन पहले बेटी को मृतक आश्रित में नौकरी मिली थी। बेटी माधुरी ने खेत खरीदा था।
दस बच्चों के सिर से उठ गया मां का साया
मृतका निर्मला अपनी बहन राधा व रिश्तेदार नीलम के साथ अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महानेपुर जा रही थी। रास्ते में हादसे का शिकार होने से तीनों की सांसे थम गई। निर्मला के परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं। यहीं राधा के दौ बच्चे है जबकि नीलम के तीन बेटे और दो बेटियां हैं। हादसे में 10 बच्चों की सिर से मां का साया उठ गया।
बालेश्वर का तो उजड़ गया पूरा परिवार
इस हादसे में बालेश्वर का तो पूरा परिवार ही उजड़ गया। वहीं बालेश्वर लखनऊ ट्रामा सेंटर में जिंदगी मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। बालेश्वर की मां का कहना था कि उसने भैयादूज के दिन बेटे और बहु, पौत्र-पौत्री को हंसी-खुशी मायके भेजा था। उसे क्या पता था कि अब यह पौत्र-पौत्री दोबारा नहीं मिलेंगे। बालेश्वर के पिता सुमेर 10 वर्ष पहले रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। जब से वह चारपाई पर पड़े हैं


