आशिक मिजाजी ने मुकेश के दिल में भर दी क्रूरता
इटावा : स्वभाव से हंसमुख सर्राफ मुकेश वर्मा पुरुषों के बजाय महिलाओं से ज्यादा बातचीत, उनके साथ हंसी ठिठोली में रुचि लेता था। पेशे से सर्राफ होने के कारण उसका यह गुण महिलाओं के बीच जल्द पहचान कायम करने, उनके साथ घुलमिल जाने का 'बिजनेस मंत्र' बन गया। 'चाची, अच्छी डिजाइन की पायलें लाया हूं, देख लो, भले ही खरीदना नहीं। भौजी, इस बार फैंसी बिछिया लाए हैं, पैसा दो-चार दिन बाद दे देना'। मुकेश इस तरह से गहनों की मार्केटिंग करने में उस्ताद था, लेकिन कानपुर में रहने वाली दूर की तलाकशुदा रिश्तेदार के आकर्षण में वह खुद की बसी- बसाई दुनिया में आग लगा बैठा।
करीब सात-आठ वर्ष से कानपुर की रिश्तेदार से बढ़ती नजदीकियों ने खुद के दांपत्य जीवन में खटास घोलना शुरू किया तो मुकेश के स्वभाव में तनाव आने लगा था। दकानपुर की रिश्तेदार से अवैध संबंधों को लेकर करवा चौथ पर घर में क्लेश हुआ था। मुकेश करवा चौथ मनाने कानपुर जाना चाहता था। पड़ोसियों के मुताबिक उस दिन न तो मुकेश को देखा गया और न ही रेखा चंद्रमा को अर्घ्य देती हुई नजर आई थी।

