चाय-पानी में 18 करोड़ ! डीएम ने अस्वीकृत किया
पटना: इस वर्ष हुए लोकसभा चुनाव खर्च में एजेंसियों ने अधिक पैसे लेने का प्रयास किया। टेंट शामियाने से लेकर मजदूर, वाहन समेत कई मद में करोड़ों का बिल जमा किया। जिलाधिकारी डा. चंद्रशेखर सिंह ने जब इसकी जांच की तो केवल 37 करोड़ का बिल ही भुगतान के योग्य पाया और 132 करोड़ में से 95 करोड़ के दावे को अस्वीकृत कर दिया।
शामियाना और टेंट के लिए 98 करोड़ रुपये का विपत्र सौंपा गया था। उसमें कटौती कर केवल 17.48 करोड़ को भुगतान के योग्य पाया गया। वहीं, चाय-पानी का बिल 18 करोड़ रुपये का दिया गया था। उसमें से महज 2.44 करोड़ के भुगतान की स्वीकृति दी गई है। बताया जाता है कि एएन कालेज केंद्र पर मतगणना के दिन मजदूरों की संख्या नौ सौ बताई गई थी। दूसरे दिन भी आठ सौ मजदूर बताकर विपत्र जमा कर दिया गया था, जबकि सारे काम उसी दिन हो गए थे। फिर दूसरे दिन इतने मजदूरों की जरूरत कहां आ पड़ी। बूथों की संख्या से ज्यादा गाड़ियों का बिल सौंपा गया।
कई अन्य बिंदुओं पर भी शंका गहराई। जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया। इसमें एडीएम आपूर्ति, जिला कल्याण पदाधिकारी एवं जिला लेखा पदाधिकारी को शामिल किया गया। जांच प्रक्रिया पर डीएम स्वयं नजर बनाए हुए थे। बीच-बीच में वे जांच प्रक्रिया की समीक्षा करते रहे। जांच टीम ने 95 करोड़ रुपये का अधिक बिल पकड़ा। जिलाधिकारी ने बताया कि एजेंसियों ने बढ़ा-चढ़ाकर बिल पेश किया था। उसकी जांच-पड़ताल कर कटौती की गई। इसके बाद 132 करोड़ में से 37 करोड़ को ही भुगतान के योग्य पाया गया। शामियाना टेंट, नाश्ता, चाय भोजन का बिल भी करोड़ों का दिया गया था। उसमें भी कटौती की गई है।


