गुरु पूर्णिमा क्या है? इसके महत्व और मनाने का तरीका...
गुरु पूर्णिमा एक पर्व है जो हिंदू और जैन धर्म के अनुयायी द्वारा मनाया जाता है। यह पर्व वार्षिक रूप से आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जो जुलाई और अगस्त के बीच पड़ती है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व गुरु शिष्य परंपरा के आदर्श को याद दिलाने के लिए होता है। इस दिन शिष्य अपने गुरु को आदर और श्रद्धा के साथ सम्मानित करते हैं। इस दिन कई लोग अपने गुरु के पास जाकर उन्हें धन्यवाद व्यक्त करते हैं और उनके चरणों में फूल चढ़ाते हैं। यह दिन गुरु शिष्य परंपरा के आदर्शों, ज्ञान, और संस्कृति को मान्यता और महत्व देने का भी एक अवसर है।
इस दिन लोग भगवान व्यास को भी याद करते हैं, जो हिंदू धर्म के महाभारत के लेखक माने जाते हैं और एक महान गुरु के रूप में भी जाने जाते हैं। व्यास महर्षि ने वेदों को संगठित किया था और महाभारत का ग्रंथ भी लिखा था। जिससे महाभारत के त्रिकालदर्शी, भगवान वेद व्यास का जन्मदिन महान पर्व गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।
आस्था और प्रेम भाव प्रगट करने का महापर्व
गुरुपूर्णिमा का त्योहार पर अपने गुरु के प्रति आस्था और प्रेम, भाव प्रगट करने का यह महापर्व है। शास्त्रों में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा माना जाता हैं। गुरु से प्राप्त ज्ञान से हमें जीवन में सत्य-असत्य, सही-गलत, धर्म-अर्धम, पाप-पुण्य का ज्ञान मिलता है। जिससे जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमे सही रास्ता, सफलता और सुख-शांति गुरु के द्वारा दिखाए देता है।
गुरुपूर्णिमा पर हिंदी शायरी -hindi shayari on gurupurnima
दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से आप अपने गुरु को गुरु पूर्णिमा के खास संदेशों को भेजकर शुभकामनाएं जरूर दे -
गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय,
बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।
गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई!2023
गुरु को पारस जानिए, करे लौह को स्वर्ण
शिष्य और गुरु, जगत में दो ही हैं वर्ण
गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं।
गुरु बिना ज्ञान नहीं, ज्ञान बिना आत्मा नहीं,
ध्यान, ज्ञान, धैर्य और कर्म सब गुरु की ही देन है।
गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई!
गुरुपूर्णिमा पर इंग्लिश शायरी - English shayari on gurupurnima
Akchar Akchar Hamein Sikhate
Sabda Sabda Ka Aarth Batate
Kabhi Pyar Se Kabhi Dant Se
Jeevan Jeena Hamein Sikhate
Happy Guru Purnima
गुरु पूर्णिमा पर कहानी - Story On Guru Purnima
एक बार की बात है गुरु ने एक शिष्य से पूछा कि नदी का पानी तो बहुत ही गंदा था परन्त तुम ये पानी कैसे लाए? शिष्य बोला गुरू जी, नदी का पानी वास्तव में बहुत गंदा था। लेकिन लोगों के नदी से चले जाने के उपरांत मैंने कुछ देर इंतजार किया और जब कुछ देर बाद नदी में मिट्टी नीचे बैठ गई और साफ पानी ऊपर आ गया। उसके बाद मैं उसी नदी से आपके लिए पानी भरकर ले आया।
गुरू, ये सुनकर बहुत खुश हुए हुए और बाकी शिष्यों को भी सीख दी कि हमारा जीवन भी नदी के पानी की तरह है। जीवन में कई बार दुख और समस्याएं आती रहती है लेकिन जीवन रूपी पानी गंदा लगने लगता है। लेकिन थोड़े इंतजार और सब्र के बाद ये सतही दुख और समस्याएं नीचे दब जाती है और अच्छा समय ऊपर आ जाता है। जीवन में सब्र जरूरी है। कुछ समय बिताने के बाद जीवन की हर समस्या हल हो जाती हैं